यह केंद्र मरीजों की सही जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा इलाज और लंबे समय तक फॉलो-अप के जरिए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और दिल व किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने का लक्ष्य रखता है।
मुंबई: ग्लेनेईगल्स अस्पताल ने मेडिटॉनिक इंडिया के साथ मिलकर दिल के मरीजों के लिए रीलन डिनर्वेशन थेरेपी सेंटर शुरू की हैं। यह सेंटर खास तौर पर उन मरीजों के लिए बनाया गया है जिनका ब्लड प्रेशर कई दवाइयाँ लेने के बाद भी कंट्रोल में नहीं आता हैं। ऐसे मरीजों की समस्या को रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन कहा जाता है।
यह नया सेंटर नई और आधुनिक मशीनों की मदद से काम करेगा। यहां अनुभवी और विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों का इलाज करेंगे। हर मरीज की पहले अच्छे से पूरी जांच की जाएगी, ताकि उनकी बीमारी को सही तरह से समझा जा सके। मरीजों को उनकी बीमारी के बारे में आसान भाषा में पूरी जानकारी दी जाएगी और सही सलाह भी दी जाएगी। डॉक्टर मरीज की दवाइयों को ध्यान से देखेंगे और जरूरत के अनुसार दवाइयों में बदलाव करेंगे, ताकि दवाएं सही तरीके से असर करें। अगर केवल दवाइयों से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं आता, तो ऐसे मरीजों को जरूरत पड़ने पर रीनल डिनर्वेशन थेरेपी दी जाएगी। इस पूरे इलाज का मुख्य उद्देश्य यह है कि मरीज का ब्लड प्रेशर लंबे समय तक सामान्य बना रहे। साथ ही दिल, दिमाग और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी खराब होने के खतरे को कम किया जा सके।
इस सेंटर की जिम्मेदारी अनुभवी और जाने-माने डॉक्टरों के हाथ में होगी। इस टीम में डायरेक्टर व कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गुप्ता, डायरेक्टर व नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भारत शाह, सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वी. एम. रेड्डी और सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत राजपूत शामिल हैं। इन सभी डॉक्टरों को दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों के इलाज का कई वर्षों का अनुभव है। इनकी विशेषज्ञता की वजह से मरीजों को अलग-अलग जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी जरूरी जांच, सलाह और इलाज एक ही जगह सही तरीके से मिल सकेगा, जिससे मरीजों की देखभाल बेहतर और आसान हो जाएगी।
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, तनाव, गलत खानपान, व्यायाम की कमी और बढ़ता वजन हाई ब्लड प्रेशर की बड़ी वजह बन रहे हैं। इसी कारण इसके मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सिरदर्द, चक्कर, सांस फूलना या धुंधला दिखना जैसे लक्षणों को लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। हाई ब्लड प्रेशर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी खराब होने का बड़ा कारण है। कई लोग समय पर जांच नहीं कराते, दवाइयां बीच में छोड़ देते हैं या जीवनशैली में बदलाव नहीं करते। कुछ मामलों में दवाइयों के बावजूद ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं आता, जिसे रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन कहते हैं। ऐसे मामलों के बेहतर इलाज के लिए ग्लेनेईगल्स अस्पताल में रीनल डिनर्वेशन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर मिलकर मरीज का सही और पूरा इलाज करते हैं।
परेल स्थित ग्लेनेईगल्स अस्पताल के डायरेक्टर और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गुप्ता ने कहॉं, “रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन अक्सर बिना लक्षण के होता है, लेकिन यह बहुत खतरनाक है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार मरीज इलाज में होते हैं, फिर भी उनका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं आता। ऐसे मरीजों के लिए रीनल डिनर्वेशन थेरेपी एक नया विकल्प है। हमारा लक्ष्य सही जीवनशैली, सही दवाइयों और आधुनिक इलाज के ज़रिए लंबे समय तक ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना है।”
ग्लेनेईगल्स अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भारत शाह ने कहॉं, “अनियंत्रित ब्लड प्रेशर सिर्फ दिल ही नहीं, किडनी को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक हाई बीपी रहने से किडनी खराब होकर क्रॉनिक किडनी डिजीज हो सकती है। नया सेंटर जोखिम वाले मरीजों की समय पर पहचान और सही इलाज में मदद करेगा। सही मरीजों में रीनल डिनर्वेशन थेरेपी अच्छे परिणाम दे सकती है।”
ग्लेनेईगल्स अस्पताल के सीईओ डॉ. बिपिन चेवाले ने कहॉं, “हाई ब्लड प्रेशर में देर से पहचान और सही फॉलो-अप की कमी बड़ी समस्या है। मेडटॉनिक इंडिया के साथ यह साझेदारी बेहतर और मरीज-केंद्रित इलाज में मदद करेगी, जिससे ब्लड प्रेशर लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सके।”
मेडटॉनिक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं वाइस प्रेसिडेंट मंदीप सिंह कुमार ने कहॉं, “रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन एक बढ़ती लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है। इस साझेदारी का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और मरीजों को आधुनिक व व्यवस्थित इलाज देना है, ताकि उनका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहे और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो।”

